ब्रेकिंग न्यूज़: सुप्रीम कोर्ट में  4 अक्टूबर को नहीं होगी राजस्थान की सुनवाई

नई दिल्ली। जय हो मजीठिया...आखिरकार माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अखबार मालिकानों और श्रमायुक्तों को खरी-खरी सुना ही दी। मजीठिया मामले पर 23 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रूख बेहद सख्त था। माननीय जज ने सख्त मौखिक टिप्पणी करते हुए पांच राज्यों के श्रमायुक्तों से कहा कि छह सप्ताह में मजीठिया की सिफारिषों का पालन कराया जाए, अगर ऐसा नहीं किया तो जेल भेज दूूंगा। पूर्व सूचना के बाद भी उत्तराखण्ड के श्रमायुक्त सुप्रीम कोर्ट में मौजूद नहीं थे, इसे लेकर भी माननीय जज ने जबरदस्त नाराजगी जताई और वारंट जारी कर दिया।

अगले ग्रुप के पांच राज्यों में नहीं राजस्थान

सुप्रीम कोर्ट ने अगले पांच राज्यों के ग्रुप के लिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट और झारखंड को चुना है। इन राज्यों की सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी। खास बात यह है कि मजीठिया मामले की सबसे ज्यादा शिकायतें भी इन्हीं राज्यों से हैं। राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक हिन्दुस्तान, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, टाइम्स ऑफ इण्डिया, हिन्दुस्तान टाइम्स समेत कई अखबारों के गढ़ इन्हीें राज्यों में हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अखबार मालिक 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये को देखकर 4 अक्टूबर से पहले ही मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को देते हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपनी फजीहत कराने का इंतजार करते हैं।

जो वेतन ज्यादा वही मान्य

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने अखबार मालिकानों की मक्कारी का सीधे तौर पर जवाब देते हुए कहा कि जो वेतन ज्यादा होगा, वही मान्य होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कौन कर्मचारी होगा, जो यह चाहेगा कि उसे कम वेतन मिले। यानी साफ है कि अखबार मालिकों की दाल 20 जे पर अब गलने वाली नहीं है। अखबार मालिक या तो सीधे तरीके से मजीठिया की सिफारिशों को लागू कर दें, नहीं तो जेल जाने का अगला नम्बर उन्हीं का है।

ठेकाकर्मी भी हकदार

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ठेकाकर्मी भी मजीठिया का हकदार है। भले ही ठेके पर हो, लेकिन कार्य तो अखबार का ही कर रहा है। ऐसे में वह भी पूरी तरह से मजीठिया का लाभ पाने के योग्य है। उसे ठेकाकर्मी बताकर अखबार मालिकान अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकते। साथियों, सुप्रीम कोर्ट के इस रूख से साफ संकेत है कि मजीठिया का लाभ तो अखबार मालिकानों को हर सूरत में देना ही पड़ेगा।