मजीठिया आयोग पर सुप्रीम कोर्ट में  19 जुलाई से फाइनल सुनवाई

नई दिल्ली। मजीठिया मामले को लेकर कई दिनों से चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में 14 मार्च को हुई सुनवाई का ऑर्डर आ चुका है। इसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की भरपूर पैरवी की है। इस ऑर्डर के मुताबिक अब काई तारीख नहीं पड़ेगी और फाइनल फैसला 19 जुलाई को आ जाएगा। यानी अखबार मालिकानों को अब कोई मौका नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर में कहा है कि जिन राज्यों ने अभी तक मजीठिया के बारे में रिपोर्ट जमा नहीं कराई है, उन्हें अंतिम मौका 5 जुलाई तक का दिया गया है। इस पर भी यदि ये राज्य रिपोर्ट जमा नहीं कराते हैं तो उन राज्यों के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत पेश होने का निर्देश दिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक यह आ रहा था कि अखबार मालिकानों की ओर से बर्खास्त,ट्रान्सफर, सस्पेंड और कई तरह से प्रताड़ित किए जा रहे कर्मचारियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लिया है। लेकिन यह गलत है सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और ऑर्डर में इसका जिक्र किया है। कोर्ट ने कहा कि प्रताड़ित किए जा रहे कर्मचारियों की संख्या बहुत ज्यादा है। प्रत्येक को सुनना कोर्ट के लिए संभव नहीं है। इसलिए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के श्रमायुक्तों को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों के लिए मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू कराए, अवैध रूप से कर्मचारियों से साइन कराने (20 जे की धारा के मामले) और प्रताड़ना समेत सभी मामले देखे और कर्मचारियों को राहत दिलाए। कोर्ट ने इस सम्बंध में रिपोर्ट 12 जुलाई तक जमा कराने का निर्देश दिया है। यानी श्रमायुक्त सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक कार्य करेगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन कर्मचारियों के लिए भी अंतिम मौका दिया है, जो अभी तक अखबार मालिकानों के डर से सुप्रीम कोर्ट नहीं गए हैं। कोर्ट ने ऑर्डर में कहा है कि जो अभी तक कोर्ट में आए हैं, या नहीं आए हैं, ऐसे सभी कर्मचारी 14 मार्च के ऑर्डर की कॉपी के साथ एक आवेदन श्रमायुक्त को दें। इस आवेदन पर प्रताड़ना, मजीठिया आयोग के मुताबिक सैलरी और एरियर नहीं देने का जिक्र हो। (हालांकि, आवेदन कैसा होगा, उसमें और क्या खानापूर्ति करनी है, यह आपके वकील ज्यादा अच्छे से बताएंगे।) इस शिकायती आवेदन पत्र के बाद श्रमायुक्त सम्बंधित अखबार मालिकानों को सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर लागू कराएंगे। इसके बाद 12 जुलाई तक वे अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा कराएंगे। सुप्रीम कोर्ट में तीन-चार दिन इस मामले में दोनों पक्षों के वकील बहस करेंगे और फिर अंततः 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुना देंगे, जो कि कर्मचारियों के पक्ष में ही होगा। यानी अखबार मालिकानों की किन्तु-परन्तु का अंत 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की लाठी कर देगी।