राजस्थान पत्रिका को एफडीआई पर विदेशी कम्पनी को देने की तैयारी

जयपुर। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने कॉस्ट कटिंग के नाम पर कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया है। इसके पीछे के कारणों का सब अपने-अपने हिसाब से आकलन कर रहे हैं। लेकिन, इसके पीछे की ठोस वजह कुछ और ही है, जिसे मीडिया होल्स ने अपने विश्वसनीय सूत्रों से पता किया है। इसकी असल वजह है कि पत्रिका मालिक अब राजस्थान पत्रिका को करीब 90 फीसदी एफडीआई पर किसी विदेशी कम्पनी को दे रहे हैं। ये विदेशी कम्पनी से 5000 करोड़ रूपए मांग रहे हैं, लेकिन वह 3000-3500 करोड़ रूपए देने को ही राजी है। इसलिए पत्रिका मालिक इसकी कॉस्ट कटिंग कम कर मुनाफा बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में कम्पनी की ग्रोथ रेट बढ़ जाए। ग्रोथ रेट बढ़ने से इनकी कम्पनी की कीमत भी बढ़ जाएगी और इन्हें मनमुताबिक दाम मिल जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि यह सारी कवायद इसलिए ही की जा रही है। पत्रिका मालिकों की इच्छा इस डील को जल्द से जल्द अंजाम देना है। संभवतः दो से तीन माह में यह सब कुछ हो जाएगा।

जो डरेगा, वही मरेगा

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया केस भी इस डील के आडे आ रहा है। इसलिए राजस्थान पत्रिका पहले फोर्ट फोलियो के कर्मचारी कम कर रही है। उनकी इस हरकत से बाकी कर्मचारी खौफजदा हो गए हैं। उनमें नौकरी जाने का भय घर कर गया है। वे जैसे-तैसे नौकरी बचाने की फिराक में लग गए हैं। ये वे कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्ति राजस्थान पत्रिका में है और जिन्होंने केस नहीं किया है। पत्रिका प्रबंधन उनके इसी डर का फायदा उठाएगा और उनसे राजस्थान पत्रिका से इस्तीफा ले लेगा। साथ ही उन्हें स्काई मीडिया में ज्वॉइनिंग भी दे देगा। इससे पत्रिका प्रबंधन को इन्हें मजीठिया का लाभ भी नहीं देना पड़ेगा। साथ ही डिजीटल विंग को चलाने के लिए मोटी सैलेरी वाले कर्मचारी भी नहीं रखने पड़ेंगे।

60 फीसदी कर्मचारी जनवरी तक साफ

उसके बाद मजीठिया केस में गए लोगों को उनका हक देकर उनसे पीछा छुड़ा लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद इनकी विदेशी मीडिया से डील करने की राह आसान हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि विदेशी कम्पनी ने भी इनको साफ कह दिया है कि उन्हें पुराने कर्मचारी नहीं चाहिए। क्योंकि, पुराने कर्मचारी होने से उसके रिटायरमेंट तक की सारी जिम्मेदारी विदेशी कम्पनी की हो जाएगी। इसलिए भी कर्मचारियों को राजस्थान पत्रिका से हटाने की कवायद की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि दिसम्बर माह के अंत तक या जनवरी के पहले सप्ताह तक करीब 60 फीसदी कर्मचारियों को हटाने की योजना है।

अमरीका जाने की योजना

सूत्रों का कहना है कि एफडीआई से जो मोटा पैसा आएगा, उसे कम्पनी के साझेदारों में बांट लिया जाएगा। इसका बड़ा हिस्सा नीहार कोठारी और सिद्धार्थ कोठारी के पास आएगा। सूत्रों का कहना है कि नीहार कोठारी तो अपने हिस्से को लेकर अमरीका चले जाएंगे। उनकी इच्छा मीडिया चलाने की नहीं है। वे अमरीका में अपने ससुराल पक्ष के लोगों के साथ होटल बिजनेस करेंगे। उनकी धर्मपत्नी और बेटी ने तो अमरीका की नागरिकता भी ले रखी है। हालांकि, एक संभावना यह भी है कि वे अमरीका में डिजीटल मीडिया भी चला सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ कोठारी मीडिया चलाने के इच्छुक हैं। इसलिए वे अपना हिस्सा लेने के बाद डिजीटल मीडिया को ही चलाएंगे। अखबार में रहे अपने 10 फीसदी हिस्सा भी उनके पास ही रहेगा। लेकिन, अखबार के कामकाज में उनकी दखलंदाजी नहीं होगी।